Jaana Nafrat Abhi Baaki Hai..!!!


poetry


आज दे रही हु मौक़ा तुम्हे,
करलो जितने सितम बाक़ी है,
मोहब्बत तो खूब देखी तुमने मेरी,
 पर Jaanaa नफ़रत अभी बाकी है,
दिल से निकले शब्दों को अक़्सर पन्नों पर उतार लेती हूं,
इसी तरह अपने दिल के दर्दो की भड़ास निकाल लेती हूं,
अरे दर्द तो इतने है कि लगता है कि पन्ने भरते ही चले जाएंगे,
पर तेरे दिए ज़ख्मो का भरना अभी बाकी है,
मोहब्बत तो खूब देखी तुमने मेरी,
 पर Jaanaa नफरत अभी बाकी है,
फ़लक के सपने दिखा कर ज़मीन का भी न छोड़ा तुमने मुझे,
शतरंज़ की बाज़ी बता कर खूब लूटा तुमने मुझे,
समझ रही थी मैं जिसे एक खेल महज़,
उस खेल की चाल असल ज़िन्दगी मैं चल रहे थे तुम,
पर ज़नाब इतना खुश होना भी अच्छा नही,
क्योंकि तब चाल चली थी तुमने,
 अभी हमारा चाल चलना बाकी है,
मोहब्बत तो खूब देखी तुमने मेरी,
 पर Jaana नफ़रत अभी बाकी है।

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